Manisha death case: हरियाणा के भिवानी जिला की टीचर मनीषा की मौत का केस: CBI ने दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट, टीचर मौत मामले को बताया सुसाइड।
Manisha death case: एक साल बाद आया जांच का नतीजा
हरियाणा के भिवानी जिले की चर्चित शिक्षिका मनीषा मौत केस में करीब एक साल की लंबी जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आखिरकार पंचकूला की विशेष CBI कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। इस केस ने पिछले साल पूरे हरियाणा में हलचल मचा दी थी और अब जांच पूरी होने के साथ ही मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है।
कौन थीं Manisha और कैसे हुई थी मौत?
मनीषा, भिवानी जिले के गांव धानी लक्ष्मण की रहने वाली एक युवा शिक्षिका थीं, जो सिंहानी गांव स्थित एक किड्स प्ले स्कूल में बच्चों को पढ़ाती थीं। बताया जाता है कि 11 अगस्त 2025 की सुबह करीब 8 बजे वह हमेशा की तरह स्कूल पढ़ाने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन उसके बाद वह लापता हो गईं। तीन दिन बाद, 13 अगस्त 2025 को सिंहानी गांव के खेतों से उनका शव संदिग्ध हालत में बरामद हुआ। शव मिलने के बाद परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी।
मामले ने पकड़ा था तूल, इंटरनेट तक बंद करना पड़ा था
इस घटना के बाद भिवानी और आसपास के इलाकों में जबरदस्त गुस्सा और प्रदर्शन देखने को मिले थे। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि प्रशासन को भिवानी और चरखी दादरी जिलों में करीब 48 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करनी पड़ी थीं। विपक्षी नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा था।
कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा शासित राज्य सरकार और पुलिस पर लापरवाही बरतने और मामले को जबरन आत्महत्या साबित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। मामले की संवेदनशीलता और जनआक्रोश को देखते हुए बाद में जांच CBI को सौंप दी गई थी।
CBI जांच में क्या निकला — पेस्टिसाइड से मौत, आत्महत्या करार
करीब नौ महीने चली जांच के बाद CBI ने अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश की। एजेंसी के अनुसार, मनीषा की मौत ऑर्गेनोफॉस्फोरस कीटनाशक (पेस्टिसाइड) का सेवन करने से हुई थी, और जांच एजेंसी ने इसे हत्या नहीं बल्कि आत्महत्या का मामला माना है। CBI ने यह क्लोजर रिपोर्ट अगस्त के दूसरे सप्ताह में पंचकूला स्थित विशेष ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, CBI कोर्ट में दाखिल की। इसके बाद शुक्रवार को कोर्ट में इस पर सुनवाई भी हुई, जिसमें मनीषा के पिता संजय समेत परिवार के अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
परिवार असंतुष्ट, पिता ने लगाया लीपापोती का आरोप
CBI की क्लोजर रिपोर्ट से मनीषा का परिवार बिल्कुल संतुष्ट नजर नहीं आ रहा। पिता संजय ने रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सच को दबाने के लिए जांच में लीपापोती की गई है। परिवार का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, वे चुप नहीं बैठेंगे। कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी परिवार की तरफ से जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े किए गए।
अब आगे क्या? परिवार के पास क्या कानूनी विकल्प बचा है
कानून के मुताबिक, क्लोजर रिपोर्ट से असंतुष्ट पक्ष के पास विशेष अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन (विरोध याचिका) दाखिल करने का अधिकार होता है। मनीषा के परिवार के पास भी यही रास्ता खुला है, और परिवार पहले ही संकेत दे चुका है कि वे इस रिपोर्ट को स्वीकार करने से पहले पूरी तरह संतुष्ट होना चाहते हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त 2026 को होनी तय हुई है, जिसमें कोर्ट यह तय करेगी कि क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया जाए या मामले में आगे किसी अन्य जांच के निर्देश दिए जाएं।
भिवानी की टीचर मनीषा की मौत का मामला एक साल तक हरियाणा की सुर्खियों में छाया रहा। अब CBI की क्लोजर रिपोर्ट ने इसे आत्महत्या का मामला करार दिया है, लेकिन परिवार के असंतोष और आने वाली सुनवाई ने यह साफ कर दिया है कि यह केस अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 27 अगस्त की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी कि अदालत आगे क्या रुख अपनाती है।





