Swati Chaudhary ने W1 तीरंदाजी में Silver Medal जीता

Swati Chaudhary ने W1 तीरंदाजी में Silver Medal जीता

Swati Chaudhary wins Silver Medal in Archery: एशियाई पैरा गेम्स 2026 में स्वाति चौधरी ने महिलाओं की W1 तीरंदाजी में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। यह भारत का इस श्रेणी में पहला पदक है।

Swati Chaudhary ने रचा इतिहास, W1 तीरंदाजी में भारत का पहला सिल्वर

नागोया में चल रहे एशियाई पैरा गेम्स 2026 में भारतीय पैरा तीरंदाज स्वाति चौधरी ने एक यादगार पल लिख दिया। महिलाओं की W1 व्यक्तिगत तीरंदाजी स्पर्धा के फाइनल में उन्होंने सिल्वर मेडल जीत लिया। यह एशियाई पैरा खेलों के इतिहास में भारत का W1 श्रेणी का पहला पदक है।

Swati Chaudhary कौन है ?

37 वर्षीय स्वाति मेरठ की रहने वाली हैं। वे गुरुकुल आर्चरी एकेडमी में एथेंस ओलंपियन सत्यदेव प्रसाद के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग लेती हैं। इस बार वे टॉप सीड के रूप में मैदान में उतरीं और फाइनल तक का सफर बेहतरीन रहा।

Swati Chaudhary का फाइनल मुकाबला

फाइनल में स्वाति का मुकाबला चीन की सें मेंगकान से था। शुरुआत में भारतीय तीरंदाज अच्छी स्थिति में रहीं। पहला सेट 25-17 से जीतकर वे 2-0 से आगे निकल गईं। तीसरे सेट में भी उन्होंने 22-21 का स्कोर बनाकर 4-2 की बढ़त बना ली।

लेकिन आखिरी दो सेट में चीनी खिलाड़ी ने वापसी की। चौथा सेट 20-30 और पांचवां 21-28 से हारने के बाद स्वाति 4-6 से मैच हार गईं। गोल्ड मेंगकान के पास चला गया, लेकिन सिल्वर ने स्वाति और पूरे देश का नाम रोशन कर दिया।

W1 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए होती है जिनके चारों अंगों में काफी हद तक कार्यात्मक कमजोरी या गति की सीमा होती है। इस चुनौतीपूर्ण वर्ग में पदक जीतना आसान नहीं होता। स्वाति का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास है क्योंकि वे इस इवेंट में पहली बार एशियाई पैरा गेम्स खेल रही थीं।

Swati Chaudhary पहले भी दिखा चुकी हैं दम

इस साल की शुरुआत में वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में स्वाति ने अच्छी उपलब्धियां हासिल की थीं। अहमदाबाद में ब्रॉन्ज और बैंकॉक में तीन सिल्वर मेडल उनके नाम हैं। घरेलू सर्किट पर भी वे 2025 के पैरा आर्चरी नेशनल चैंपियनशिप और खेलो इंडिया पैरा गेम्स में गोल्ड जीत चुकी हैं।

उनका यह सिल्वर भारत के लिए दिन का पहला मेडल भी साबित हुआ और कुल मेडल तालिका में देश की गिनती बढ़ाई।

स्वाति चौधरी का यह सफर साबित करता है कि मेहनत और सही दिशा मिलने पर कोई भी बाधा मुश्किल नहीं रहती। मेरठ से निकली यह पैरा एथलीट अब पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई हैं। एशियाई पैरा गेम्स में भारत की झोली में एक और चमकता सिल्वर जुड़ गया है।

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