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NEET पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा खुलासा: NTA के एक्सपर्ट्स ही निकले पेपर लीक कराने के मास्टरमाइंड

CBI makes major revelation in NEET paper leak case

CBI makes major revelation in NEET paper leak case:  मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) से जुड़े पेपर लीक कांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है।

NEET UG Paper Leak

NEET UG Paper Leak, CBI Chargesheet, NTA Expert Scam — देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) से जुड़े पेपर लीक कांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। जिस एजेंसी पर देश के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों की परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने की जिम्मेदारी थी, उसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जुड़े विषय विशेषज्ञों पर अब पेपर लीक कराने का गंभीर आरोप लगा है। इस खुलासे ने पूरे देश में परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और साख पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

CBI ने NEET-UG पेपर लीक केस में अपनी पहली चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में कुल 13 आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन आरोपियों में NTA के तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जो बायोलॉजी, केमिस्ट्री और फिजिक्स जैसे अहम विषयों के प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जांच एजेंसी के मुताबिक यही एक्सपर्ट्स पेपर लीक करने वाले पूरे नेटवर्क की कड़ी बने।

चार्जशीट के अनुसार आरोपियों में शामिल हैं:

पैसों के लेन-देन का भी खुलासा

CBI की जांच में यह भी सामने आया है कि पेपर लीक कराने के बदले मोटी रकम का लेन-देन हुआ था। जांच एजेंसी को डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय और अकादमिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर यह पुख्ता सबूत मिले हैं कि आरोपियों ने परीक्षा से पहले ही लीक हुए प्रश्नों को आगे फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाई। जांच के दौरान आरोपियों के कई बैंक खाते, एक बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता भी फ्रीज किया जा चुका है, ताकि आर्थिक लेन-देन के सुराग सुरक्षित रखे जा सकें।

शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और देशव्यापी विरोध

गौरतलब है कि नीट-यूजी 2026 का पेपर लीक होने की खबर सामने आने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा था। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए और परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए। इसी दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके कुछ ही दिनों बाद CBI ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की।

क्या NTA अधिकारियों की भूमिका भी सामने आई?

CBI की जांच में एक अहम पहलू यह भी है कि अब तक की जांच में NTA के किसी वरिष्ठ अधिकारी या सरकारी कर्मचारी की सीधी संलिप्तता के सबूत नहीं मिले हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, प्रश्नपत्र कथित तौर पर उन शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों के जरिए बाहर पहुंचा, जिन्हें पेपर तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। यानी लीक की जड़ पेपर सेटिंग प्रक्रिया में शामिल एक्सपर्ट पैनल के भीतर से ही जुड़ी बताई जा रही है, न कि NTA के प्रशासनिक ढांचे से।

परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने एक बार फिर देश की सबसे संवेदनशील प्रवेश परीक्षाओं में से एक की सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जब पेपर तैयार करने और उसकी गोपनीयता बनाए रखने का जिम्मा जिन विशेषज्ञों पर था, वही लीक में शामिल पाए गए, तो यह सवाल लाजमी है कि आखिर लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी सेंध कैसे लगी।

अब आगे क्या होगा ?

CBI की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और भी आरोपियों तथा तथ्यों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है। छात्र संगठनों और अभिभावकों की मांग है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रक्रिया में सख्त और पारदर्शी सुधार किए जाएं, ताकि मेहनती छात्रों के साथ अन्याय न हो और नीट जैसी परीक्षाओं पर से जनता का भरोसा दोबारा कायम हो सके।

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