चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने की बैलट पेपर से चुनाव करवाने की मांग,ईवीएम पर उठाए सवाल

दिल्लीः आज मुख्य विपक्षी दलों ने कंस्टीटूशन क्लब में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को लेकर बैठक की। सभी ने बैलट पेपर से वोटिंग की मांग की।

लोकसभा चुनाव के पहले चरण के दो दिन बाद आज रविवार को 6 मुख्य विपक्षी दलों ने ईवीएम को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर हमला किया। मीटिंग में ईवीएम को लेकर सवाल उठे। आँध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू ने ईवीएम को लेकर सवाल उठाते हुए कहा,हम ईवीएम के बारे में सवाल उठा रहे हैं। मतदाताओं का विश्वास केवल बैलट पेपर से के माध्यम से ही बहाल किया जा सकता है। यहां तक कि जर्मनी जैसा विकसित देश भी बैलट पेपर का ही इस्तेमाल करता है।

कांग्रेस पार्टी के नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हम 21 विपक्षी दलों का पक्ष रख रहे हैं। चुनाव प्रक्रिया पर बार-बार सवाल उठ रहे हैं। हम फिर से सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। चुनाव आयोग इस पर ध्यान नही दे रहा है। पहले चरण के मतदान में ऐसा हुआ बटन किसी का दबाने से वोट किसी और को जा रहा था। सबसे बड़ी बात ये है कि कोर्ट ने हमारी दलील मानी है। हम सुप्रीम कोर्ट से कहेंगे कि 50 फीसदी वीवीपैट की गिनती होनी चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि हमें मतदाता पर पूरा विश्वास है लेकिन ईवीएम पर नही। इलेक्शन कमीशन वीवीपैट की मांग को क्यों अनसुना कर रहा है। हमें 24 घंटे के लिए ईवीएम दें ,हम बता देंगे की गड़बड़ी कैसे होती है। अदालत के लिए सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि जमीनी स्तर पर नही देख पाती।

वहीँ दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश के लोगों को ईवीएम पर भरोषा नही है। लोकतंत्र पर सवाल उठ रहे हैं। आज सिर्फ एक पार्टी को छोड़कर बाकि सभी पार्टियां बैलट पेपर से चुनाव की मांग कर रही हैं। खराब मशीने भी सिर्फ बीजेपी को ही वोट देती हैं। इसकी जांच क्यों नही होती ?वोटिंग मशीन को जानबूझकर खराब किया जा रहा है ताकि बीजेपी को फायदा पहुँच सके। विपक्ष को हराने और वोट कटवाने के लिए बीजेपी ऐसा कर रही है।

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