Sushil Kumar bail plea: Delhi High Court ने सागर धनखड़ हत्याकांड मामले में दो बार ओलंपिक पदक विजेता सुशील को जमानत देने से इंकार कर दिया है।
Sushil Kumar को दिल्ली हाई कोर्ट से नहीं मिली जमानत
दो बार के ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार को दिल्ली हाई कोर्ट से एक और बड़ा झटका लगा है। पहलवान सागर धनखड़ की हत्या के मामले में सुशील कुमार ने नियमित जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद सुशील कुमार की जेल से बाहर आने की उम्मीदों को फिलहाल एक और झटका लगा है।
क्या है पूरा मामला ?
यह मामला 4-5 मई 2021 की रात का है, जब जूनियर नेशनल कुश्ती चैंपियन सागर धनखड़ की दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम परिसर में बेरहमी से पिटाई कर हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक सागर धनखड़ और उनके साथियों को कुछ लोगों द्वारा जबरन अगवा करके स्टेडियम लाया गया था, जहां लाठी-डंडों और हॉकी स्टिक से उन पर बेरहमी से हमला किया गया। इस पूरे मामले में पहलवान सुशील कुमार को मुख्य आरोपी बनाया गया था।
सुशील कुमार को इस मामले में मई 2021 में गिरफ्तार किया गया था। अक्टूबर 2022 में अदालत ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं—हत्या, आपराधिक साजिश, धमकी और घातक हथियार से हमले—के तहत उनके खिलाफ आरोप तय किए थे। तभी से यह मामला ट्रायल कोर्ट में चल रहा है और सुशील कुमार पिछले कई सालों से जेल में बंद हैं।
रोहिणी कोर्ट से पहले ही खारिज हो चुकी थी जमानत
सुशील कुमार के लिए यह पहला मौका नहीं है जब उनकी जमानत याचिका खारिज हुई हो। सुशील कुमार ने रोहिणी कोर्ट द्वारा 6 फरवरी को पारित उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में नई याचिका दाखिल की थी, जिस पर 20 फरवरी को सुनवाई तय हुई थी।
गौर करने वाली बात यह भी है कि इससे पहले हाई कोर्ट ने मार्च 2025 में सुशील कुमार को एक बार नियमित जमानत दी थी, लेकिन बाद में यह जमानत रद्द हो गई और मामला फिर से सुनवाई के दौर से गुजरा।
हाई कोर्ट में सुशील कुमार ने क्या तर्क दिए?
अपनी जमानत याचिका में सुशील कुमार की ओर से कई अहम दलीलें दी गई थीं। उनका कहना था कि रोहिणी कोर्ट में अभियोजन पक्ष के सभी प्रमुख और महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही अब पूरी हो चुकी है, इसलिए गवाहों को प्रभावित करने की कोई आशंका नहीं बचती और उन्हें नियमित जमानत मिलनी चाहिए। इसके अलावा सुशील कुमार की ओर से यह भी कहा गया कि अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद परिस्थितियों में बदलाव आया है,और इसी आधार पर उनकी जमानत याचिका पर नए सिरे से विचार किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, सागर धनखड़ के पिता ने ट्रायल कोर्ट में सुशील कुमार की नियमित जमानत याचिका का लगातार विरोध किया। पीड़ित पक्ष का यह विरोध भी अदालत के फैसले में एक अहम पहलू माना जा रहा है।
दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला
लंबी सुनवाई के बाद आखिरकार अदालत ने सुशील की जमानत अर्जी खारिज कर दी। इस तरह सुशील कुमार को नियमित जमानत के मोर्चे पर एक बार फिर निराशा हाथ लगी है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे।
सुशील कुमार का कुश्ती करियर
सुशील कुमार भारतीय कुश्ती जगत के सबसे बड़े नामों में से एक रहे हैं। उन्होंने 2008 बीजिंग ओलंपिक में 66 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कैटेगरी में कांस्य पदक जीता था, वहीं 2012 लंदन ओलंपिक में रजत पदक अपने नाम किया था। वह भारत की ओर से लगातार दो ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी थे, जिसने उन्हें देश के सबसे सम्मानित एथलीटों में शुमार किया। मगर सागर धनखड़ हत्याकांड ने उनके शानदार करियर पर गहरा दाग लगा दिया है और आज वह इसी मामले में वर्षों से सलाखों के पीछे हैं।
आगे क्या?
कानूनी जानकारों के मुताबिक, सुशील कुमार के पास अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का विकल्प खुला है। वहीं ट्रायल कोर्ट में मुख्य मुकदमे की सुनवाई अपनी गति से जारी रहेगी। सागर धनखड़ हत्याकांड, जिसने 2021 में पूरे देश को झकझोर दिया था, आज भी भारतीय खेल जगत के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में गिना जाता है।







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