जस्टिस पीसी घोष बने देश के पहले लोकपाल

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पीसी घोष 19 मार्च को 8 अन्य सदस्यों की नियुक्ति के साथ
देश के पहले लोकपाल बने। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया नियुक्त।

न्यायमूर्ति पीसी घोष के आलावा,न्यायिक सदस्य सेवानिवृत्त न्यायाधीश पीके मोहंती ,
सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप बी ,सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी , सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति
ए त्रिपाठी बने।

लोकपाल के गैर-न्यायिक सदस्यों में पूर्व सशस्त्र सीमा बल प्रमुख अर्चना रामासुंदरम, महाराष्ट्र के
पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन, महेन्द्र सिंह, और आई.पी. गौतम हैं।

न्यायाधीश पीसी घोष की नियुक्ति साल 2014 में देशव्यापी भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद
2013 में पारित होने के बाद लोकपाल अधिनियम को अधिसूचित किए जाने के लगभग पांच साल
बाद हुई है।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों सहित शीर्ष लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की
जांच के लिए केंद्र राज्यों में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्तों के लिए कानून बनाता है।

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) घोष का नाम प्रधान मंत्री मोदी के नेतृत्व वाली चयन समिति जिसमें
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और न्यायविद मुकुल रोहतगी
शामिल थे ने पारित किया। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी के अंत तक सरकार को लोकपाल नियुक्त करने
के लिए कहा था।

लोकपाल सर्च कमेटी द्वारा शीर्ष दस नामों की सूचि में से चुने गए जस्टिस पीसी घोष 8 मार्च
2013 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे। 27 मई 2017 को रिटायर हुए। वर्तमान लोकपाल
पीसी घोष राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य भी हैं।

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