न्यूजीलैंड के यूट्यूबर कार्ल रॉक को भारत सरकार ने किया ब्लैक लिस्ट, बताई यह वजह

भारत सरकार ने न्यूजीलैंड के मशहूर यूट्यूबर कार्ल रॉक का वीजा मानदंडों का उल्लंघन करने के आरोप में 1 साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया है। कार्ल रॉक पर टूरिस्ट वीजा के नाम पर भारत में कारोबार करने का आरोप है। जिस कारण उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। न्यूजीलैंड के नागरिक कार्ल रॉक ने भारत सरकार पर उन्हें बगैर कोई कारण बताए देश में प्रवेश करने से मना करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि ब्लैक लिस्ट होने के चलते वह भारत में अपनी भारतीय पत्नी से अलग रह रहे हैं। हालांकि गृह मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वीजा शर्तों के उल्लंघन को लेकर उन्हें आने की अनुमति नहीं दी गई है।

कार्ल रॉक ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न से इस बारे में गुहार लगाई है और उन्होंने ब्लैक लिस्ट में डालने के बाद सरकार के फैसले को वापस लेने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। जनता का समर्थन जुटाने के लिए कार्ल रॉक ने एक ऑनलाइन याचिका भी शुरू की है।

अपने आपको कंटेंट क्रिएटर होने का दावा करने वाले कार्ल रॉक ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर पर अपने जीवन की कहानी का एक वीडियो साझा करते हुए आईएमकार्लरॉक हैंडल से ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा कि प्रिय जैसिंडा अर्डर्न, भारत सरकार ने मुझे भारत में प्रवेश करने से रोक कर मुझे अब दिल्ली में रह रही अपनी पत्नी और परिवार से अलग कर दिया है। उन्होंने बिना कोई कारण बताए मुझे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया है।

न्यूजीलैंड के नागरिक कार्ल रॉक ने दावा किया है कि उनकी पत्नी मनीषा मलिक भारत के हरियाणा प्रदेश से हैं और उनकी साल 2019 में शादी हुई थी। उन्होंने यह भी दावा किया है कि वह पिछले साल कोरोनावायरस से संक्रमित हो गए थे और इस बीमारी से उबरने के बाद उन्होंने कोरोना संक्रमित मरीजों की मदद के लिए दिल्ली में दो बार प्लाज्मा डोनेट किया था।

दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि वीजा नियम एवं शर्तों का उल्लंघन करने को लेकर न्यूजीलैंड के नागरिक को अगले 1 साल तक भारत में प्रवेश करने से रोका गया है। मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि कार्ल रॉक का वीजा पर्यटन का है । वह भारत में कारोबारी गतिविधियां करते हैं और वीजा के अन्य नियमों का उल्लंघन करते पाया गया है।

ट्विटर पर शेयर किए किए गए वीडियो में कार्ल रॉक ने दावा किया है कि करीब 8 महीने पहले जब वह दुबई और पाकिस्तान जाने वाले थे, उन्हें हवाई अड्डा पर कहा गया था कि उनका भारतीय वीजा रद्द हो गया है। उन्होंने गृह मंत्रालय के अधिकारियों और न्यूजीलैंड में भारतीय उच्चायोग से संपर्क कर उसका कारण जानना चाहा था। उन्होंने कहा है कि उनको अभी तक किसी से भी कोई जवाब नहीं मिला है । जिसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख कर राहत देने की मांग की है और उनका भारत में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने संबंधी सरकार के फैसले को पलटने का अनुरोध किया है।

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