Preeti Pal ने पैरा एशियन गेम्स 2026 में 200 मीटर T35 स्पर्धा में रजत पदक जीता

Preeti Pal ने पैरा एशियन गेम्स 2026 में 200 मीटर T35 स्पर्धा में रजत पदक जीता

Preeti Pal रजत पदक (Silver Medal ) जीतकर फिर छा गईं। 200 मीटर T35 में 29.53 सेकंड का समय निकालने वाली इस पैरा स्टार की पूरी कहानी पढ़ें।

Preeti Pal ने Silver Medal जीता

प्रीति पाल रजत पदक जीतकर एक बार फिर देश का सिर ऊंचा कर दिया है। महिलाओं की 200 मीटर T35 स्पर्धा में उन्होंने 29.53 सेकंड का समय निकाला और दूसरे स्थान पर रहीं। यह नतीजा सिर्फ़ एक पदक नहीं है। यह उस मेहनत का सबूत है जो वे बरसों से चुपचाप करती आ रही हैं।

Preeti Pal के साथ रजत की दौड़ में क्या हुआ ?

200 मीटर की दौड़ में हर सेकंड का हिसाब होता है। प्रीति ने ट्रैक पर पूरी ताकत झोंकी और 29.53 सेकंड में फिनिश लाइन पार की। यह समय उनके पेरिस पैरालंपिक वाले 30.01 सेकंड से तेज़ है। यानी वे अपने ही पुराने प्रदर्शन से आगे निकल गईं।

इस बार वे जापान में हो रहे पैरा एशियन गेम्स 2026 में उतरी थीं। वे T35 श्रेणी में 100 मीटर और 200 मीटर दोनों दौड़ों में हिस्सा ले रही हैं। मेरठ समेत पूरे उत्तर प्रदेश को उनसे पदक की उम्मीद थी, और उन्होंने इसे पूरा किया।

T35 श्रेणी क्या होती है?

कई पाठक पूछते हैं कि T35 का मतलब क्या है। यह उन पैरा एथलीटों की श्रेणी है जिनके शरीर में समन्वय से जुड़ी दिक्कत होती है, जैसे सेरेब्रल पाल्सी में देखने को मिलती है। ऐसे खिलाड़ियों के लिए दौड़ना संतुलन और नियंत्रण की बड़ी चुनौती होती है। इसी वजह से उनका हर कदम और हर सेकंड दोगुना कीमती हो जाता है।

पेरिस से यहां तक का सफर

प्रीति का नाम भारतीय पैरा खेलों में पहले से बड़ा है। पेरिस पैरालंपिक 2024 में उन्होंने 100 मीटर T35 में 14.21 सेकंड के साथ कांस्य जीता। इसके बाद 200 मीटर T35 में 30.01 सेकंड के साथ दूसरा कांस्य पदक जीता। इसके साथ वे पैरालंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बनीं।

इसी साल नई दिल्ली में हुए वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में भी उन्होंने 200 मीटर T35 से T37 वर्ग में 30.26 सेकंड के साथ स्वर्ण जीता। यानी फॉर्म लगातार अच्छा रहा है और यह रजत उसी सिलसिले की अगली कड़ी है।

प्रीती पाल के हौसले की कहानी

प्रीति पाल उत्तर प्रदेश से हैं और बचपन में उन्हें सेरेब्रल पाल्सी का पता चला था। वहां से पैरालंपिक के पोडियम और अब एशियाई मंच तक पहुंचना आसान नहीं रहा। कई साल उन्होंने बिना शोर किए प्रैक्टिस की, कई बार मेडल से चूकीं, और हर बार पहले से मजबूत होकर लौटीं। नई दिल्ली में उन्होंने खुद कहा था कि अभ्यास में वे 29.6 सेकंड तक का समय निकाल चुकी हैं। आज उनकी वही मेहनत रेस के नतीजे में दिखी।

प्रीति अब भी 100 मीटर दौड़ में उतरेंगी, जहां उनसे एक और पदक की उम्मीद रहेगी। आगे उनकी नजर विश्व चैंपियनशिप और 2028 लॉस एंजिल्स पैरालंपिक पर रहेगी। 29.53 सेकंड का यह समय बताता है कि वे उस लक्ष्य की दिशा में सही रास्ते पर हैं।

प्रीति पाल रजत पदक की यह कहानी हर उस खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है जिसे कभी कहा गया कि यह तुमसे नहीं होगा। उनके अगले मुकाबले का इंतजार पूरे देश को रहेगा। भारतीय खेल प्रेमी और पैरा स्पोर्ट्स समुदाय इस सफलता पर खुशी जता रहा है। उम्मीद है कि प्रीति आगे भी ऐसे ही शानदार प्रदर्शन जारी रखेंगी और देश के लिए और पदक लाएंगी।

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