रफाल डील क्लीन चिट मामला,वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण का चौंकाने वाला खुलासा

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने रफाल डील मामले में सर्वोच्च न्यायालय से केंद्र की बीजेपी सरकार को क्लीन चिट मिलने पर सवालिया निशान लगाए हैं। श्री भूषण के अनुसार कोर्ट ने मामले की तह तक न जाकर क्लीन चिट दी है। 

प्रशांत भूषण ने कहा कि मैंने अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा जी ने मिलकर एक याचिका दायर की थी। हमने रफाल डील की कोर्ट की निगरानी में जाँच करने की मांग की थी। कोर्ट ने हमारी दलीलों पर ध्यान नहीं दिया। कोर्ट ने यह बोलते हुए याचिका को ख़ारिज कर दिया कि हम हवाई जहाजों की कीमत के बारे में ज्यादा जाँच नहीं कर सकते और न ही इस केस की गहराई में जा सकते हैं। 

हम लोग कोर्ट में इस आधार पर गए थे। हम लोगों ने सीबीआई को शिकायत दर्ज कराई थी। हमने सीबीआई को ये बोला था कि  इस डील में वर्ष 2006 के अनुबंध अनुसार 126 हवाई जहाज की डील होनी थी। जिसमें ये तय हुआ था कि फ्रांस सरकार हमें 18 हवाई जहाज बने बनाए देगी और बाकि 108 को भारत में ही बनाया जाएगा। साल 2006 में टेंडर इशू हुए। छह कंपनियों ने टेंडर भरे। इनमें से तकनीकी जाँच के बाद दो कंपनियों को चुना गया। प्रशांत भूषण ने बताया। 

25 मार्च 2015 को फ्रांस के पेरिस में एक मीटिंग होती हुई। जिसमें ये तय हुआ  हिंदुस्तान ऐरोनॉटिकल कंपनी को ये ठेका दिया गया। लेकिन उसके  ठीक 15 दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एक अलग सौदा कर लेते हैं,जिसमें फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ ये करार हुआ कि हम सिर्फ 36 हवाई जहाज खरीदेंगे। जो पूरी तरह से बने बनाए होंगे। कोई मेक इन इंडिया नहीं होगा। लेकिन इस सौदे में अनिल अंबानी की बिना अनुभव वाली कंपनी को ये ठेका दिया गया। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अनील अंबानी की कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए ये सौदा किया। जब ये सवाल उठे कि बिना तुजर्बे वाली और कुछ ही दिन पहले बनी अनील अंबानी की कंपनी को कैसे दे दिया। तब फ्रांस के राष्ट्रपति ने ये बोला कि इसमें हम कुछ नहीं कर सकते। भारत सरकार ने ही बोला कि अगर सौदा करना है तो अनील अंबानी की कंपनी को ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट देना पड़ेगा।

प्रशांत भूषण ने ये कहा,जब किसी सौदे पर आरोप लगते हैं तो उसकी जाँच होनी चाहिए। उन्होंने कहा सर्वोच्च न्यायालय ने बिना किसी जाँच के  रफाल डील मामले में केंद्र सरकार को क्लीन चिट दे दी है। जिसकी जाँच होना जरूरी है।  

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