Sharmila Dhankhar ने Glasgow 2026 कामनवेल्थ गेम्स में महिलाओं की पैरा शॉट पुट स्पर्धा में 9.81 मीटर बेस्ट थ्रो के साथ भारत को दूसरा Gold Medal दिलाया है।
Sharmila Dhankhar बनी भारत की पहली पैरा गोल्ड मेडलिस्ट
9.81 मीटर बेस्ट थ्रो के साथ शर्मिला धनखड़ भारत की पहली पैरा एथलेटिक्स गोल्ड मेडलिस्ट बन गई हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला स्वर्ण पदक जीता है। इससे भारत का पैरा एथलेटिक्स में 20 साल का इन्तजार खत्म हुआ है। साथ ही शिल्पा के शाइला को ड्रामा के बाद ब्रॉन्ज मिला, जिससे भारत का पहला डबल पोडियम फिनिश पैरा एथलेटिक्स में हुआ।
शर्मीला धनखड़ कौन हैं ?
शर्मिला हरियाणा के छितरौली (या चितरौली) गांव की रहने वाली हैं। दो साल की उम्र में पोलियो से एक पैर प्रभावित हो गया। उन्होंने घरेलू हिंसा और मुश्किलों का सामना किया। 34 साल की उम्र में एथलेटिक्स शुरू की, जब ज्यादातर एथलीट रिटायर हो जाते हैं। अपने दूसरे पति (कोच) वीरेंद्र धनखड़ की प्रेरणा से उन्होंने खेल अपनाया। उनकी बेटियों ने भी खेलों में रुचि दिखाई।
Sharmila Dhankhar के रिकॉर्ड
वे बर्मिंघम 2022 CWG में वे चौथे स्थान पर रहीं (राष्ट्रीय रिकॉर्ड 8.43 मीटर के साथ), लेकिन मेडल छूट गया। उसके बाद वे लगातार सुधरीं। 2025 इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड (9.77 मीटर), 2026 फज्जा इंटरनेशनल (दुबई) में शॉट पुट गोल्ड और डिस्कस ब्रॉन्ज। राष्ट्रीय चैंपियन बनीं और F57 शॉट पुट में भारत की अग्रणी खिलाड़ी।
Glasgow 2026 में उन्होंने 9.81 मीटर थ्रो कर घाना की जिनाबू इस्साह (8.65 मीटर, सिल्वर) और नाइजीरिया की यूचारिया इयाजी (शुरुआत में ब्रॉन्ज, बाद में रद्द) को पीछे छोड़ा। शिल्पा का 7.26 मीटर पर्सनल बेस्ट थ्रो ब्रॉन्ज में बदल गया जब भारतीय विरोध के बाद नाइजीरियाई खिलाड़ी का थ्रो फाउल घोषित हुआ।
गोल्ड मैडल जीतकर क्या बोलीं शर्मीला ?
शर्मिला ने मेडल अपनी मां को समर्पित किया। उन्होंने कहा: “मैं देश के लिए मेडल जीतकर बेहद खुश हूं। यह मेरा और मेरी मां का सपना था। मेहनत से जीता। मां खुश होंगी। एशियन गेम्स और ओलंपिक अगले लक्ष्य हैं। यह मेरा पहला मेडल है और आगे कई और जीतूंगी।” 40 साल की उम्र में यह कहानी प्रेरणा की है। वे पोलियो, घरेलू हिंसा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक पहुंचीं।
CWG 2026 के पांचवें दिन भारत का मैडल टैली
ग्लासगो 2026 (23वां संस्करण, स्कॉटलैंड) में भारत का अभियान वेटलिफ्टिंग से मजबूत शुरू हुआ। मिराबाई चानू ने महिला 48 किग्रा में तीसरा लगातार CWG गोल्ड जीतकर पहला गोल्ड दिया। पांचवें दिन (मुख्यतः 27 जुलाई रात-28 जुलाई) मेडल्स की झड़ी लगी:
- शर्मिला धनखड़: गोल्ड (पैरा शॉट पुट F57)
- शिल्पा के. शाइला: ब्रॉन्ज (उसी इवेंट में)
- सर्वेश अनिल कुशारे: सिल्वर (पुरुष हाई जंप)
- वल्लुरी अजय बाबू: सिल्वर (पुरुष 79 किग्रा वेटलिफ्टिंग)
- ज्ञानेश्वरी यादव : सिल्वर (महिला 53 किग्रा वेटलिफ्टिंग
- बिंद्यारानी देवी: ब्रॉन्ज (महिला 58 किग्रा वेटलिफ्टिंग
इसके अलावा पहले के मेडल: ऋषिकांत सिंह (सिल्वर, 60 किग्रा), मुथुपंडी राजा (सिल्वर, 65 किग्रा), झंडू कुमार (ब्रॉन्ज, पैरा पावरलिफ्टिंग)।
भारत का टोटल मेडल टैली (पांचवें दिन के बाद, रिपोर्ट्स के अनुसार): 2 गोल्ड, 5 सिल्वर, 3 ब्रॉन्ज =कुल 10 मेडल। वेटलिफ्टिंग में सबसे ज्यादा (1G + 4S + 1B), पैरा एथलेटिक्स में 2 (1G + 1B), एथलेटिक्स में 1 सिल्वर, पैरा पावरलिफ्टिंग में 1 ब्रॉन्ज।
भारत के लिए यादगार दिन
यह दिन इसलिए यादगार रहा क्योंकि पैरा एथलेटिक्स में ऐतिहासिक डबल पोडियम, हाई जंप में सिल्वर और वेटलिफ्टिंग में और मेडल आए। भारत की टीम लगभग 122 सदस्यीय थी (एबल-बॉडीड और पैरा स्पोर्ट्स मिलाकर)। ग्लासगो में कुछ स्पोर्ट्स कम होने से कुल मेडल 2022 बर्मिंघम (61) से कम रह सकते हैं, लेकिन गुणवत्ता और पैरा सफलता महत्वपूर्ण है।
शर्मिला की कहानी सिर्फ मेडल की नहीं बल्कि दृढ़ संकल्प, देर से शुरू करने और बाधाओं को पार करने की है। वे अब एशियन गेम्स और पैरालंपिक की ओर देख रही हैं। भारत के लिए ग्लासगो अभियान जारी हैऔर ऐसे प्रदर्शन देश को गर्व दिलाते हैं। शर्मिला जैसी एथलीट्स दिखाती हैं कि उम्र, विकलांगता या व्यक्तिगत संकट सपनों को रोक नहीं सकते।





