Shubham Kumar बिहार के मुंगेर जिले के रहने वाले हैं। शुभम कुमार ने विश्व के 197 देशों की यात्रा का इतिहास रच दिया है। वे ऐसा कारनामा करने वाले पहले एशियन और भारतीय बन गए हैं।
Shubham Kumar ने हासिल की बड़ी उपलब्धि
शुभम कुमार जिन्हे Nomad Shubham के नाम से भी जाना जाता है, बिहार के मुंगेर जिले के एक छोटे से गांव Makwa के रहने वाले हैं। उन्होंने मात्र 24 वर्ष की उम्र में दुनिया के सभी 197 देशों की यात्रा पूरी कर ली है। इसी के साथ शुभम ऐसा कारनामा करने वाले पहले युवा भारतीय और सबसे युवा एशि यन बन गए हैं। वे भारतीय पासपोर्ट पर यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय हैं।
Shubham Kumar कौन हैं ?
- शुभम कुमार का जन्म 2 दिसंबर 2002 को बिहार के मुंगेर जिले एक साधारण परिवार में हुआ।
- 2026 में उनकी उम्र 24 वर्ष है।
- यात्रा की अवधि : उन्होंने अपनी वैश्विक यात्रा 2016 में शुरू की थी। उन्हें ये उपलब्धि हासिल करने में लगभग 10 साल का समय लगा।
- शुभम कुमार का इंस्टाग्राम हैंडल : @nomadShubham , वे एक फुल टाइम ट्रैवलर ब्लॉगर हैं।
- अंतिम देश : शुभम ने 197वे देश के रूप में ब्राजील की यात्रा पूरी की।
Shubham Kumar की यात्रा का तरीका
शुभम कुमार की ज्यादातर यात्रा बजट ट्रैवल और लिफ्ट लेकर आगे बढ़ने पर आधारित है। वे रोजाना सिर्फ 500 रुपए में बजट यात्रा करते थे। ट्रक, बस, पैदल चलना , कोल्ड ट्रक में ट्रैवल करना पेट्रोल पंप पर सोना, उनकी यात्राओं में शामिल रहा। उन्होंने -71 डिग्री तक के तापमान में यात्रा की। वे जनजातीय लोगों के साथ रहे और कई बार उन्हें डिटेंशन का सामना भी करना पड़ा। लेकिन कभी रुके नहीं।
Shubham Kumar का हौसला
उन्होंने दिखाया कि करोड़ों रुपए या लग्जरी की जरूरत नहीं, बस, जूनून, हिम्मत और स्मार्ट प्लानिंग से दुनिया घूमी जा सकती है। उन्होंने भारतीय पासपोर्ट की वीजा चुनौतियों के बावजूद भी यह कर दिखाया।
Shubham Kumar की खास उपलब्धि
- दुनिया के 197 देशों की यात्रा बहुत कम लोगों ने पूरी की है।
- वे बिहार से निकलकर ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति और एशिया के सबसे युवा हैं।
- पहले भारतीय में कुछ ट्रैवलर्स 100 से 150 देश घूम चुके हैं। लेकिन 24 साल की उम्र में 197 देशो की यात्रा करना, इतिहास रचने वाला काम है।
शुभम की कहानी बिहार के युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है। उन्होंने एक छोटे से गांव से निकलकर इतिहास रचा और अपने सपने पुरे किए। उनकी यात्रा में चुनौतियाँ बहुत थी लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।





