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Rat Fever (Leptospirosis) क्या है, जानें लक्षण, बचाव, खतरा और इलाज की पूरी जानकारी

Rat Fever (Leptospirosis)

Rat Fever (Leptospirosis) बारिश के मौसम में ज्यादा फैलता है। आम बोलचाल की भाषा में इसे चूहा बुखार के नाम से जाना जाता है। नीचे रैट फीवर के बारे विस्तार से पढ़ें।

Rat Fever (Leptospirosis) क्या होता है ?

बारिश का मौसम आते ही जगह-जगह पानी जमा होने लगता है। इसी जलजमाव के साथ एक खतरनाक बीमारी भी सिर उठाने लगती है, जिसे आम बोलचाल में “चूहा बुखार” या “रैट फीवर” कहा जाता है। मेडिकल भाषा में इसे लेप्टोस्पायरोसिस (Leptospirosis) कहते हैं।

हाल ही में झारखंड की राजधानी रांची से चिंताजनक खबर सामने आई है। जहां एक निजी अस्पताल में पिछले दो महीनों के भीतर 130 से ज्यादा लोग इस बीमारी की चपेट में आकर इलाज करा चुके हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर यह बीमारी है क्या, कैसे फैलती है, इसके लक्षण क्या हैं, और इससे बचाव कैसे किया जाए।

Rat Fever (Leptospirosis) क्या है ?

Leptospirosis एक जीवाणु जनित संक्रामक बीमारी है। जो लेप्टोस्पाइरा नाम के बैक्टीरिया की वजह से होती है। यह एक जूनोटिक बीमारी मानी जाती है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से चूहों, कुत्तों, गाय-भैंस और सूअर जैसे जानवरों के शरीर में पाया जाता है और इनके पेशाब के जरिए बाहर निकलता है।

बारिश के मौसम में जब चूहों और अन्य संक्रमित जानवरों का पेशाब बरसाती पानी, कीचड़ या मिट्टी में मिल जाता है, तो वह पानी या मिट्टी संक्रामक हो जाती है। इसी दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से इंसान इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।

चूहा बुखार कैसे फैलता है ?

इस बीमारी के फैलने का सबसे बड़ा कारण जलजमाव और गंदा पानी है। नीचे कुछ आम कारण बताए गए हैं जिनसे यह संक्रमण फैलता है:

यह बैक्टीरिया शरीर की त्वचा में मौजूद छोटी-छोटी दरारों, आंख, नाक या मुंह की झिल्लियों के जरिए भी शरीर में प्रवेश कर सकता है, इसलिए बारिश के मौसम में सतर्क रहना बहुत जरूरी है।

चूहा बुखार के लक्षण क्या हैं ?

लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण आम फ्लू या वायरल बुखार जैसे ही होते हैं, इसलिए शुरुआत में इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है। आमतौर पर संक्रमण के 2 से 30 दिन के भीतर लक्षण दिखने लगते हैं। इसके प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं

अगर समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और लिवर, किडनी तथा फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसी स्थिति में मरीज की जान को भी खतरा हो सकता है, इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

चूहा बुखार से जुड़ा खतरा किन लोगों को ज्यादा?

कुछ लोगों में इस बीमारी की चपेट में आने का खतरा ज्यादा रहता है, जैसे:

बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों की तुलना में कमजोर होती है, इसलिए बारिश के मौसम में बच्चों का खास ध्यान रखने की सलाह डॉक्टर देते हैं।

चूहा बुखार से बचाव के उपाय

इस बीमारी से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतना बहुत जरूरी है:

  1. जलजमाव वाले पानी में नंगे पैर चलने से बचें, गमबूट या जूते पहनकर ही निकलें
  2. शरीर पर किसी तरह का घाव या कट हो तो उसे दूषित पानी के संपर्क में बिल्कुल न आने दें
  3. पानी उबालकर या फिल्टर करके ही पिएं
  4. घर और आसपास सफाई रखें, ताकि चूहों का प्रकोप न बढ़े
  5. कचरा खुले में न फेंके, ढककर रखें
  6. हाथों को साबुन से बार-बार धोएं, खासकर खाना खाने से पहले
  7. पालतू जानवरों का समय-समय पर टीकाकरण कराएं
  8. अगर काम की वजह से गंदे पानी के संपर्क में आना जरूरी हो तो दस्ताने और गमबूट जैसे सुरक्षा उपकरण जरूर पहनें

रैट फीवर का इलाज और दवाई 

अगर बीमारी शुरुआती स्तर पर पकड़ में आ जाए तो इसका इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से आसानी से किया जा सकता है। डॉक्टर आमतौर पर डॉक्सीसाइक्लिन या पेनिसिलिन जैसी एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं।  जिनसे मरीज जल्दी ठीक हो जाता है।

हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी भी सूरत में खुद से दवा लेना ठीक नहीं है, क्योंकि हर मरीज की स्थिति अलग होती है और सही दवा व खुराक डॉक्टर की सलाह पर ही तय होनी चाहिए।

गंभीर मामलों में, जहां लिवर, किडनी या फेफड़े प्रभावित हो चुके हों, वहां मरीज को अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज की जरूरत पड़ती है। ऐसे मामलों में डायलिसिस जैसी सुविधा की भी जरूरत पड़ सकती है। इसलिए लक्षण दिखते ही देरी न करें और तुरंत किसी नजदीकी अस्पताल में जांच कराएं।

रांची में बढ़ते चूहा बुखार के मामले

गौरतलब है कि रांची में बारिश और जलजमाव के बीच लेप्टोस्पायरोसिस के मामलों में तेजी देखी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रांची के एक निजी अस्पताल में बीते दो महीनों के भीतर 130 से ज्यादा लोग इस संक्रमण की वजह से इलाज करा चुके हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि बारिश के मौसम में जलजमाव और दूषित पानी की वजह से यह बीमारी तेजी से फैल रही है, और खासकर बच्चों में इसके मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लोगों को साफ-सफाई और सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।

चूहा बुखार यानी लेप्टोस्पायरोसिस एक ऐसी बीमारी है जो बारिश के मौसम में तेजी से फैलती है। थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता से इससे आसानी से बचा जा सकता है। अगर बुखार, बदन दर्द या पीलिया जैसे लक्षण दिखें तो लापरवाही न बरतें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर पहचान और इलाज से इस बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी लक्षण के दिखने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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