Sakshi Chaudhary Biography Hindi

Sakshi Chaudhary जीवन परिचय: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 गोल्ड मेडलिस्ट बॉक्सर की पूरी कहानी

Sakshi Chaudhary Biography Hindi: हरियाणा के भिवानी जिले के एक छोटे से गांव धनाना में जन्मी साक्षी चौधरी आज भारतीय बॉक्सिंग का सबसे चमकता नाम बन चुकी हैं।

Sakshi Chaudhary Biography Hindi

ग्लास्गो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 51 किलोग्राम फ्लाईवेट वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर साक्षी ने न सिर्फ देश का नाम रोशन किया, बल्कि एक किसान परिवार की बेटी से लेकर इंडियन आर्मी की हवलदार और अब वर्ल्ड चैंपियन बनने तक का प्रेरणादायक सफर भी पूरी दुनिया के सामने रखा। आइए जानते हैं साक्षी चौधरी के जन्म, शिक्षा, परिवार, करियर, कुल पदक और नेट वर्थ के बारे में विस्तार से।

साक्षी चौधरी का जन्म और शुरुआती जीवन

साक्षी चौधरी का जन्म 9 सितंबर 2000 को हरियाणा के भिवानी जिले के धनाना गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता मनोज कुमार पेशे से किसान हैं, जबकि मां सुमन देवी गृहिणी हैं। बचपन से ही साक्षी का स्वभाव बेहद ऊर्जावान और लड़ाकू रहा — वे अक्सर बच्चों से झगड़ पड़ती थीं, जिससे उनके माता-पिता चिंतित रहते थे। साल 2008 के बीजिंग ओलंपिक में भिवानी के ही मुक्केबाज विजेंदर सिंह के कांस्य पदक जीतने के बाद पूरे जिले में बॉक्सिंग का क्रेज बढ़ा, और परिवार ने साक्षी की इसी ऊर्जा को सही दिशा देने का फैसला किया।

शिक्षा और बॉक्सिंग की शुरुआत

साक्षी ने अपनी स्कूली शिक्षा भिवानी में ही पूरी की और पढ़ाई के साथ-साथ बॉक्सिंग की ट्रेनिंग को बराबर समय दिया। साल 2012 में महज 12 साल की उम्र में उन्होंने विजेंदर सिंह को अपना आदर्श मानते हुए बॉक्सिंग ग्लव्स पहन लिए। उन्हें तराशने की जिम्मेदारी द्रोणाचार्य अवार्ड विजेता कोच जगदीश सिंह ने संभाली, जो पहले विजेंदर सिंह को भी कोचिंग दे चुके थे।

साक्षी के पिता हर दिन उन्हें स्कूटर से करीब 20 किलोमीटर दूर भिवानी बॉक्सिंग क्लब ले जाते थे, और यह सिलसिला दिन में दो बार चलता था। साक्षी की दिनचर्या बेहद अनुशासित रही है — वे रोज सुबह साढ़े चार बजे उठकर ट्रेनिंग के लिए निकल जाती थीं।

बॉक्सिंग शुरू करने के पहले ही साल उन्होंने सब-जूनियर हरियाणा स्टेट चैंपियनशिप में रजत पदक जीता और इसके बाद लगातार दो सालों तक राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

करियर: नेशनल से इंटरनेशनल तक का सफर

साक्षी चौधरी के करियर की सबसे बड़ी छलांग तब आई जब महज 15 साल की उम्र में उन्होंने साल 2015 में ताइपे में आयोजित वर्ल्ड जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद उन्होंने भारत में हुई वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक हासिल किया और साल 2018 में हंगरी में अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव करते हुए लगातार दूसरी बार यूथ वर्ल्ड चैंपियन बनीं।

सीनियर स्तर पर कदम रखते ही साक्षी ने एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी पदक जीता। हालांकि साल 2022 में कंधे की गंभीर चोट ने उनके करियर को बड़ा झटका दिया, जिसकी वजह से वे कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स जैसे बड़े टूर्नामेंट नहीं खेल सकीं। इसी दौर में दिसंबर 2022 में वे भारतीय सेना के मिशन ओलंपिक कार्यक्रम से जुड़ीं और उन्हें कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में हवलदार नियुक्त किया गया। सेना से मिले वर्ल्ड-क्लास ट्रेनिंग सपोर्ट और मेडिकल सुविधाओं ने उनकी वापसी को नई ताकत दी।

चोट से उबरने के बाद साक्षी ने साल 2025 में कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में 54 किलोग्राम वर्ग का गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया — वे यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: गोल्ड तक का शानदार सफर

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की टीम में जगह बनाने के लिए साक्षी ने बड़ा जोखिम उठाया। उन्होंने अपने पुराने 54 किलोग्राम वर्ग को छोड़कर मात्र तीन हफ्तों में वजन घटाकर 51 किलोग्राम फ्लाईवेट वर्ग में उतरने का फैसला किया। पटियाला में हुए नेशनल सिलेक्शन ट्रायल्स में उन्होंने दो बार की विश्व चैंपियन निखत जरीन को सेमीफाइनल में और मौजूदा विश्व चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा को फाइनल में 5-0 से हराकर टीम में जगह पक्की की। इसी दमदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय बॉक्सिंग की “जायंट किलर” कहा जाने लगा।

ग्लास्गो में साक्षी ने राउंड ऑफ 16 में बोत्सवाना की मुक्केबाज को हराकर अभियान शुरू किया, इसके बाद क्वार्टरफाइनल और सेमीफाइनल में क्रमशः उत्तरी आयरलैंड और कनाडा की मुक्केबाजों को मात दी। फाइनल में उनका सामना इंग्लैंड की रूबी व्हाइट से हुआ, जो लगातार 68 मुकाबले जीत चुकी थीं। साक्षी ने इस अजेय सिलसिले को तोड़ते हुए 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था और पहले ही प्रयास में उन्होंने चैंपियन बनकर इतिहास रच दिया।

भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बॉक्सिंग में रिकॉर्ड सात गोल्ड सहित कुल दस पदक जीते, जो किसी भी एक संस्करण में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इसी ऐतिहासिक अभियान का हिस्सा बनकर साक्षी चौधरी ने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की।

साक्षी चौधरी: संक्षिप्त परिचय (Quick Facts)

  • पूरा नाम : साक्षी चौधरी
  • जन्म तिथि : 9 सितंबर 2000
  • जन्मस्थान : धनाना गांव, भिवानी, हरियाणा
  • पिता : मनोज कुमार (किसान)
  • माता : सुमन देवी (गृहिणी)
  • पेशा : भारतीय महिला मुक्केबाज, भारतीय सेना में हवलदार
  • विभाग : कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस (CMP)
  • भार वर्ग : 51 किलोग्राम (फ्लाईवेट)
  • कोच : जगदीश सिंह (शुरुआती कोच), छोटे लाल (नेशनल कोच)
  • प्रमुख उपलब्धियां : वर्ल्ड जूनियर चैंपियन (2015), वर्ल्ड यूथ चैंपियन (2017, 2018), वर्ल्ड बॉक्सिंग कप गोल्ड (2025), कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड (2026)
  • उपनाम : भारतीय बॉक्सिंग की “जायंट किलर”

नोट: नेट वर्थ को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है — मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग अनुमान दिए गए हैं, इसलिए यहां किसी निश्चित रकम का उल्लेख नहीं किया जा रहा।

साक्षी चौधरी की कुल उपलब्धियां और पदक

  • 2015 — वर्ल्ड जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप, ताइपे: गोल्ड मेडल
  • 2017 व 2018 — वर्ल्ड यूथ बॉक्सिंग चैंपियनशिप: लगातार दो गोल्ड मेडल
  • 2021 — एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप: पदक
  • 2025 — वर्ल्ड बॉक्सिंग कप, अस्ताना (कजाकिस्तान): गोल्ड मेडल (54 किग्रा)
  • 2026 — 56वां ग्रैंड प्रिक्स उस्ती नाद लाबेम, चेकिया: गोल्ड मेडल
  • 2026 — कॉमनवेल्थ गेम्स, ग्लास्गो: गोल्ड मेडल (51 किग्रा) — करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि

निजी जीवन

साक्षी चौधरी लाइमलाइट से दूर रहकर एक अनुशासित और सादा जीवन जीना पसंद करती हैं। उनका पूरा ध्यान रिंग और देश के लिए पदक जीतने पर केंद्रित रहता है। रोजाना सुबह साढ़े चार बजे उठना, कड़ी ट्रेनिंग और सख्त डाइट कंट्रोल उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। भारतीय सेना में हवलदार के तौर पर सेवा देने के साथ-साथ वे बॉक्सिंग करियर को भी पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रही हैं।

धनाना गांव की एक किसान बेटी से लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की गोल्ड मेडलिस्ट बनने तक साक्षी चौधरी का सफर मेहनत, अनुशासन और जज्बे की मिसाल है। चोट के बाद वापसी करते हुए वर्ल्ड चैंपियन और फिर कॉमनवेल्थ चैंपियन बनना उनकी दृढ़ता को दर्शाता है। आने वाले समय में साक्षी की नजरें एशियन गेम्स और ओलंपिक पदक पर टिकी हैं, और भारतीय बॉक्सिंग प्रशंसकों को उनसे आगे भी कई सुनहरे पलों की उम्मीद है।

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