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Ariha Pangambam ने स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास, ऐसा रिकॉर्ड बनाने वाली एकमात्र जिम्नास्ट बनीं

Ariha Pangambam won gold medal

Ariha Pangambam ने 10वीं एरोबिक जिम्नास्टिक्स एशियन चैंपियनशिप में स्पर्धा स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। वे ऐसा कारनामा करने वाली एकमात्र भारतीय हैं।

अरिहा पंगमबाम (Ariha Pangambam) ने रचा इतिहास

भारतीय खेल जगत के लिए 7 अगस्त 2026 का दिन हमेशा याद रखा जाएगा। मणिपुर की युवा जिम्नास्ट अरिहा पंगमबाम ने फिलीपींस के टगायटे शहर में आयोजित हो रही 10वीं एशियन एरोबिक जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप में सीनियर महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर दिया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इस श्रेणी में यह भारत का अब तक का पहला स्वर्ण पदक है।

कैसा रहा Ariha Pangambam का फाइनल मुकाबला?

टगायटे सिटी वेलोड्रोम में 4 से 7 अगस्त तक चली इस चैंपियनशिप के फाइनल में अरिहा ने कुल 19.100 अंकों के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। उनके स्कोर का विवरण देखें तो आर्टिस्ट्री यानी कलात्मकता में उन्हें 8.650 अंक मिले, एक्जीक्यूशन यानी प्रस्तुति की शुद्धता में 7.600 अंक और डिफिकल्टी यानी कठिनाई स्तर में 2.850 अंक हासिल हुए। इस बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर वे महाद्वीप के बाकी सभी प्रतिस्पर्धियों से आगे निकल गईं और भारत के लिए इतिहास रच दिया।

गौरतलब है कि इस चैंपियनशिप का आयोजन एशियन जिम्नास्टिक्स यूनियन के तत्वावधान में फिलीपींस जिम्नास्टिक्स एसोसिएशन ने करवाया था। इसमें भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, मंगोलिया, कंबोडिया, चीनी ताइपे, हांगकांग और मेजबान फिलीपींस सहित 11 देशों के 400 से अधिक खिलाड़ियों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

कौन हैं अरिहा पंगमबाम

अरिहा पंगमबाम मणिपुर के इम्फाल की रहने वाली 22 वर्षीय जिम्नास्ट हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत काफी पहले कर दी थी और लगातार मेहनत के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वे 2023 और 2025 में हुए नेशनल गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं और कई बार की राष्ट्रीय चैंपियन रह चुकी हैं। इससे पहले वे फिग एरोबिक जिम्नास्टिक्स वर्ल्ड चैंपियनशिप, जापान में हुए सुजुकी वर्ल्ड कप और पिछली एशियन चैंपियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

दिलचस्प बात यह है कि अरिहा का यह सफर आसान नहीं रहा। 2022 और 2024 की एशियन चैंपियनशिप में वे दोनों बार चौथे स्थान पर रहते हुए पदक से चूक गई थीं। लेकिन इस बार उन्होंने अपनी उन कमियों को पीछे छोड़ते हुए इतिहास रच दिया। डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी इस सफलता में उनके कोच युमनाम रंजन सिंह का भी अहम योगदान माना जा रहा है, जिन्होंने लंबे समय तक उन्हें तराशा।

बधाइयों का सिलसिला

अरिहा की इस ऐतिहासिक जीत पर देशभर से बधाइयों का तांता लग गया। जिम्नास्टिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सुधीर मित्तल ने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए अरिहा और उनके कोच को बधाई दी। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने भी सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देते हुए इसे मणिपुर और पूरे देश के लिए गर्व का पल बताया। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने भी अरिहा की इस उपलब्धि को भारतीय जिम्नास्टिक्स के इतिहास में एक मील का पत्थर बताया और उम्मीद जताई कि उनकी यह सफलता युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी।

भारतीय जिम्नास्टिक्स के लिए क्यों खास है यह पल?

एरोबिक जिम्नास्टिक्स भारत में अभी उतना लोकप्रिय खेल नहीं माना जाता जितना क्रिकेट, हॉकी या कुश्ती जैसे खेल हैं। ऐसे में किसी भारतीय खिलाड़ी का एशियन स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना इस खेल को देश में नई पहचान दिला सकता है। अरिहा की यह जीत आने वाले वर्षों में मणिपुर सहित पूरे देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी, जो इस खेल में करियर बनाने का सपना देखते हैं।

मणिपुर, जिसने भारत को कई ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं, अरिहा की इस जीत से एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। उम्मीद है कि आने वाले समय में अरिहा पंगमबाम विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में भी अपनी इसी लय को बरकरार रखते हुए भारत के लिए और भी पदक जीतेंगी।

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