Ashmita Chaliha Wins Korea Masters Title 2026: गुवाहाटी की स्टार शटलर अश्मिता चालिहा ने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।
Ashmita Chaliha ने जीता BWF वर्ल्ड टूर खिताब
भारतीय बैडमिंटन के लिए रविवार का दिन बेहद खास साबित हुआ, जब गुवाहाटी की स्टार शटलर अश्मिता चालिहा ने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली।
दक्षिण कोरिया के आसान शहर में खेले गए कोरिया मास्टर्स 2026 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल फाइनल में 26 वर्षीय अश्मिता चालिहा ने चीन की चौथी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी हान कियान शी को रोमांचक मुकाबले में मात देकर अपना पहला BWF वर्ल्ड टूर खिताब अपने नाम कर लिया। यह उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा टूर्नामेंट खिताब है और इसके साथ ही उन्होंने भारतीय बैडमिंटन इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है।
Ashmita Chaliha ने पहला गेम हारने के बाद शानदार वापसी की
फाइनल मुकाबले की शुरुआत अश्मिता चालिहा के लिए आसान नहीं रही। दुनिया की 35वें नंबर की खिलाड़ी और मौजूदा जर्मन ओपन चैंपियन हान कियान शी ने शुरुआत से ही दबदबा बनाते हुए पहला गेम 21-14 से अपने नाम कर लिया था। ऐसा लग रहा था कि चीनी शटलर आसानी से खिताब जीत जाएंगी, लेकिन विश्व रैंकिंग में 50वें स्थान पर काबिज अश्मिता चालिहा ने हार नहीं मानी।
Ashmita Chaliha ने ऐसे जीता खिताब
पहला गेम गंवाने के बावजूद अश्मिता ने दमदार वापसी करते हुए दूसरे गेम में अपनी लय हासिल की और शुरुआती संघर्ष के बाद 15-11 की बढ़त बना ली, जिसे उन्होंने आगे बढ़ाकर 19-14 तक पहुंचा दिया। इसके बाद हान का एक रिटर्न कोर्ट के बाहर चला गया, जिससे अश्मिता को चैंपियनशिप पॉइंट मिला और उन्होंने निर्णायक गेम को 21-14 से अपने नाम कर खिताब पर कब्जा जमाया। कुल मिलाकर अश्मिता चालिहा ने यह फाइनल मुकाबला 14-21, 21-14, 21-14 से जीता।
इस शानदार जीत के साथ ही अश्मिता चालिहा का यह करियर का पहला BWF वर्ल्ड टूर सुपर 300 खिताब बन गया है। यह जीत भारतीय महिला एकल बैडमिंटन के लिए एक यादगार पखवाड़े को पूरा करती है, क्योंकि एक हफ्ते पहले ही तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन का खिताब जीता था।
टूर्नामेंट में शुरू से ही दिखा दमदार प्रदर्शन
कोरिया मास्टर्स 2026 सुपर 300 टूर्नामेंट में अश्मिता चालिहा का सफर बेहद प्रभावशाली रहा।फाइनल तक पहुंचने से पहले उन्होंने रिरीना हिरामोतो, किम मिन जी, जापान की शीर्ष वरीयता प्राप्त हिना अकेची और हमवतन रक्षिता रामराज को हराकर अपनी काबिलियत साबित की।
क्वार्टर फाइनल में अश्मिता का मुकाबला दुनिया की 22वें नंबर की खिलाड़ी और टूर्नामेंट की टॉप सीड जापानी शटलर हिना अकेची से हुआ था, जिसे उन्होंने 63 मिनट तक चले रोमांचक मुकाबले में 20-22, 21-15, 21-19 से हराकर टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर किया।
इसके बाद सेमीफाइनल में अश्मिता का सामना हमवतन रक्षिता श्री संतोष रामराज से हुआ। यह पूरी तरह भारतीय बनाम भारतीय मुकाबला था, जिसमें अश्मिता ने 48 मिनट तक चले संघर्षपूर्ण मैच में रक्षिता को 21-13, 16-21, 21-13 से हराकर पहली बार अपने करियर में किसी BWF वर्ल्ड टूर टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई थी।
चोट से वापसी के बाद मिली बड़ी सफलता
अश्मिता चालिहा के लिए यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि हाल के महीनों में उन्हें चोट के चलते कोर्ट से बाहर रहना पड़ा था। तीन महीने तक चोट से जूझने के बाद वापसी करने वाली अश्मिता ने जून में मकाऊ ओपन के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था, जबकि मई में मलेशिया मास्टर्स के क्वार्टर फाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इन झटकों के बावजूद अश्मिता ने हिम्मत नहीं हारी और कोरिया मास्टर्स में अपनी फॉर्म और मेहनत के दम पर सबसे बड़ा खिताब जीत लिया।
भारतीय महिला बैडमिंटन के लिए शानदार साल
अश्मिता चालिहा की यह जीत साल 2026 में भारतीय महिला एकल बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए एक और सुनहरा पल लेकर आई है। इस सीजन में अश्मिता से पहले तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन, पीवी सिंधु ने जापान ओपन और देविका सिहाग ने थाईलैंड मास्टर्स का खिताब अपने नाम किया था। अब अश्मिता चालिहा इस सूची में शामिल होने वाली चौथी भारतीय महिला शटलर बन गई हैं, जिन्होंने इस साल कोई एकल BWF खिताब जीता है। इसके अलावा सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने मई में सिंगापुर बैडमिंटन ओपन में पुरुष युगल खिताब जीता था।
यह लगातार सफलता दिखाती है कि भारतीय बैडमिंटन, खासकर महिला एकल वर्ग में, खिलाड़ियों की गहराई और प्रतिस्पर्धा लगातार मजबूत हो रही है। पीवी सिंधु और साइना नेहवाल जैसी दिग्गज खिलाड़ियों के बाद अब तन्वी शर्मा, देविका सिहाग और अश्मिता चालिहा जैसी युवा प्रतिभाएं भारतीय बैडमिंटन का भविष्य संवार रही हैं।
अश्मिता चालिहा कौन हैं ?
गुवाहाटी, असम की रहने वाली अश्मिता चालिहा बाएं हाथ से खेलने वाली खिलाड़ी हैं, जिनकी घातक स्मैश उनकी खास पहचान है। उन्हें लंबे समय से भारतीय बैडमिंटन के भविष्य की एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के तौर पर देखा जाता रहा है। कोरिया मास्टर्स 2026 का खिताब जीतकर उन्होंने अपनी इस पहचान को सही साबित कर दिया है और आने वाले समय में उनसे और बड़ी सफलताओं की उम्मीद की जा रही है।
अश्मिता चालिहा की यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी से बढ़कर है — यह उनके धैर्य, कड़ी मेहनत और चोट के बाद वापसी की प्रेरणादायक कहानी है, जो आने वाले युवा खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल बनेगी।





