Bodhana Sivanandan youngest chess champion: 11 साल की बोधना शिवानंदन बनीं ब्रिटेन की सबसे कम उम्र की महिला शतरंज चैंपियन, कोवेंट्री में रचा इतिहास।
ब्रिटिश शतरंज जगत ने एक और सुनहरा अध्याय लिख लिया है। महज 11 साल की उम्र में भारतीय मूल की शतरंज प्रतिभा बोधना (Bodhana Sivanandan) शिवानंदन ने वह कर दिखाया है जो आज तक कोई नहीं कर पाया — वह ब्रिटेन की सबसे कम उम्र की महिला शतरंज चैंपियन (chess champion) बन गई हैं। यह उपलब्धि उन्होंने कोवेंट्री के वारविक विश्वविद्यालय में आयोजित ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप के एक रोमांचक रैपिड प्लेऑफ़ मुकाबले में हासिल की।
Bodhana Sivanandan ने रचा इतिहास
यह टूर्नामेंट अपने 122 साल के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा संस्करण था, जिसमें विभिन्न स्पर्धाओं में ,600 से ज़्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।नौ दिनों तक चले इस मुकाबले के अंत में दो युवा सितारों ने शीर्ष खिताब अपने नाम किए। 17 साल के शेरयस रॉयल ने ओवरऑल ब्रिटिश खिताब जीता और नौ राउंड के बाद तालिका में शीर्ष पर रहे, जिन्होंने अनुभवी ग्रैंडमास्टर ल्यूक मैकशेन और नौ बार के चैंपियन माइकल एडम्स को आधे अंक से पीछे छोड़ा।</cite> वहीं दूसरी ओर, बोधना शिवानंदन ने महिला वर्ग में नया इतिहास रच दिया।
टूर्नामेंट के दौरान बोधना का इकलौता मुकाबला हार में गया, वह भी छठे राउंड में शेरयस रॉयल के खिलाफ। लेकिन असली रोमांच बाकी था — शीर्ष महिला खिलाड़ियों के बीच हुए एक कड़े रैपिड-चेस प्लेऑफ़ में बोधना ने आयरलैंड की 14 साल की ट्रिशा कन्यामराला को हराया, जो खुद एक बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और WGM खिताब हासिल करने वाली पहली आयरिश महिला हैं।
पहले भी दो खिताब जीत चुकी हैं Bodhana Sivanandan, अब बनाया ट्रिपल क्राउन
यह जीत बोधना के लिए कोई पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है। इससे पहले वह ओपन महिला ब्लिट्ज चैंपियन और संयुक्त ब्रिटिश महिला रैपिड चैंपियन का खिताब पहले ही अपने नाम कर चुकी थीं।अब क्लासिकल फॉर्मेट में मिली इस जीत के साथ उन्होंने शतरंज की तीनों प्रमुख श्रेणियों — क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज़ — में खिताब जीतकर एक दुर्लभ ‘ट्रिपल क्राउन’ हासिल कर लिया है।
टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही आयोजकों ने बोधना को उस खिलाड़ी के रूप में चिन्हित किया था जिसके पास इतिहास बदलने का मौका है। दरअसल यह रिकॉर्ड पहले 1939 में एलेन प्रिचर्ड के नाम था, जिन्होंने महज 13 साल की उम्र में यह खिताबलियोनेल मेसी ने दो बार गोल्डन बॉल का खिताब जीतकर रचा इतिहस जीता था। इसके बाद 2013 में अक्षया कलैयलहन ने अपने 12वें जन्मदिन से महज कुछ दिन पहले यह खिताब साझा किया था। अब बोधना ने इन दोनों रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ते हुए नया इतिहास रच दिया है।
ग्रैंडमास्टर ने कहा — “यह असाधारण प्रतिभा है”
इस ऐतिहासिक जीत पर इंग्लिश चेस फेडरेशन के लिए कमेंट्री कर रहे ग्रैंडमास्टर डैनी गॉर्मली भी अपनी भावनाएं छुपा नहीं पाए। उन्होंने बोधना की जीत को असाधारण करार देते हुए कहा कि वह एक जनरेशनल टैलेंट यानी पीढ़ियों में एक बार आने वाली प्रतिभा हैं, और आने वाले सालों में बोधना के ओवरऑल खिताब के लिए भी दावेदारी पेश करने की उम्मीद जताई।
लॉकडाउन में शुरू हुआ Bodhana Sivanandan का शतरंज का सफर
बोधना शिवानंदन की यह कहानी किसी परीकथा से कम नहीं है। लंदन के हैरो इलाके में रहने वाली बोधना का शतरंज से परिचय साल 2020 के कोविड लॉकडाउन के दौरान हुआ, जब वह महज छह साल की थीं और उन्हें घर पर एक चेसबोर्ड मिला। शुरुआत में यह महज एक शौक था, लेकिन जल्द ही यह जुनून में बदल गया और देखते ही देखते बोधना ने असाधारण प्रगति करनी शुरू कर दी।
अपने छोटे से करियर में बोधना कई बार सुर्खियां बटोर चुकी हैं:
- साल 2025 में लिवरपूल में हुई ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप में उन्होंने 60 साल के ग्रैंडमास्टर पीटर वेल्स को हराकर किसी ग्रैंडमास्टर को मात देने वाली सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड बनाया था।
- अगस्त 2025 में उन्होंने अपना तीसरा और आखिरी वुमन इंटरनेशनल मास्टर (WIM) नॉर्म हासिल कर यह खिताब पाने वाली सबसे युवा खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया।
- ग्रीस के रोड्स में हुए यूरोपियन क्लब कप में उन्होंने पूर्व विश्व चैंपियन ग्रैंडमास्टर मारिया मुज़िचुक को हराकर एक और कीर्तिमान स्थापित किया।
- अप्रैल 2026 में जारी हुई फीडे (FIDE) की रैंकिंग में बोधना ब्रिटेन की नंबर-1 महिला शतरंज खिलाड़ी बन गई थीं और वैश्विक टॉप-100 महिला रैंकिंग में भी जगह बनाई थी।
इसके अलावा बोधना नौ साल की उम्र में ही हंगरी में हुए शतरंज ओलंपियाड में इंग्लैंड महिला टीम का हिस्सा बनकर किसी भी खेल में इंग्लैंड का अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी भी बन चुकी हैं।
भारतीय मूल की प्रतिभा Bodhana Sivanandan पर पूरे देश को गर्व
बोधना शिवानंदन भारतीय मूल की हैं और उनकी यह सफलता न सिर्फ ब्रिटेन बल्कि दुनियाभर में शतरंज प्रेमियों और भारतीय समुदाय के लिए गर्व का विषय बन गई है। इतनी कम उम्र में अनुभवी और वरिष्ठ खिलाड़ियों को पछाड़कर राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप जीतना बोधना की असाधारण प्रतिभा, मेहनत और समर्पण का प्रमाण है।
आगे क्या? Bodhana Sivanandan से हैं बड़ी उम्मीदें
शतरंज जगत के जानकारों का मानना है कि बोधना शिवानंदन )Bodhana Sivanandan) का यह सफर अभी शुरुआत भर है। जिस रफ्तार से उन्होंने बीते कुछ सालों में एक के बाद एक रिकॉर्ड तोड़े हैं, उससे साफ है कि आने वाले समय में वह ब्रिटिश शतरंज ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय शतरंज परिदृश्य में भी एक बड़ा नाम बन सकती हैं। कोवेंट्री की यह जीत उनके शानदार करियर की महज एक और सीढ़ी है, और शतरंज प्रेमी बेसब्री से उनके अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।





