Diwali 2026: इस बार घर में दिवाली को लेकर बहस कम होनी चाहिए, क्योंकि तारीख साफ है। दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। कार्तिक मास की अमावस्या इसी दिन शाम के प्रदोष काल में मिल रही है, इसलिए लक्ष्मी-गणेश पूजन भी इसी शाम होगा। छुट्टी का दिन होने से परिवार को पूजा और सजावट के लिए आराम से समय मिल जाएगा।
आज 3 नवंबर है, यानी तैयारी के लिए बस कुछ ही दिन बचे हैं। चलिए, पहले तारीख और मुहूर्त देख लेते हैं, फिर पूजा की विधि, महत्व और छोटी-छोटी बातें।
Diwali 2026 Date क्या है ?
- तारीख: रविवार, 8 नवंबर 2026
- तिथि: कार्तिक कृष्ण अमावस्या
- विक्रम संवत: 2083
दिल्ली के पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह लगभग 11:30 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर को दोपहर लगभग 12:30 बजे तक रहेगी। अब सवाल उठता है कि जब अमावस्या दो दिन में फैली है तो दिवाली 9 को क्यों नहीं? वजह सीधी है। लक्ष्मी पूजा शाम को प्रदोष काल में की जाती है, और प्रदोष का पूरा समय 8 नवंबर की शाम को ही अमावस्या में पड़ रहा है। 9 नवंबर की शाम तक तिथि खत्म हो चुकी होगी। इसलिए दिवाली 8 को ही मानी जाएगी।
Diwali 2026 के Shubh Muhurat का समय क्या है ?
दिल्ली और आसपास के लिए समय कुछ इस तरह है:
- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक
- अवधि: करीब 1 घंटा 56 मिनट
- प्रदोष काल: शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक
- लग्न: वृषभ (स्थिर लग्न)
यह मुहूर्त क्यों खास माना जाता है? परंपरा कहती है कि स्थिर लग्न में की गई पूजा में लक्ष्मी जी घर में टिककर रहती हैं। वृषभ लग्न स्थिर है और इस बार प्रदोष काल के भीतर ही पड़ रहा है। इसी वजह से पंचांग इसी खिड़की को सबसे अच्छा बताते हैं।
एक जरूरी बात। मुहूर्त का समय शहर के हिसाब से बदलता है, क्योंकि सूर्यास्त अलग-अलग जगह अलग होता है। नागपुर के पंचांग में यही मुहूर्त शाम 5:59 से रात 7:58 बजे तक दिया गया है। कुछ वेबसाइटों पर आपको थोड़े अलग आंकड़े भी दिखेंगे, क्योंकि हर पंचांग की गणना का तरीका अलग होता है। अगर आपके कोई पारिवारिक पंडित जी हैं तो उनसे एक बार पूछ लें, वरना अपने शहर का द्रिक पंचांग देख लें।
दिवाली के पांच दिन, पूरा कैलेंडर
- धनतेरस: शुक्रवार, 6 नवंबर। दिल्ली में पूजा का मुहूर्त शाम 6:02 से 7:58 बजे तक बताया गया है। बर्तन, सोना-चांदी या झाड़ू खरीदने की परंपरा इसी दिन की है।
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): काली चौदस 7 नवंबर, शनिवार को है। दिल्ली के पंचांग में अभ्यंग स्नान की बात 8 नवंबर की सुबह की है। इसीलिए अलग-अलग वेबसाइट पर छोटी दिवाली की तारीख 7 या 8 नवंबर दिखेगी। भ्रमित न हों।
- दिवाली और लक्ष्मी पूजा: रविवार, 8 नवंबर।
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट: मंगलवार, 10 नवंबर
- भाई दूज: ज्यादातर पंचांग 11 नवंबर, बुधवार बता रहे हैं। कुछ जगह 10 नवंबर भी लिखा है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देख लें।
- देव दिवाली: 24 नवंबर, मंगलवार। वाराणसी में इसकी रौनक देखने लायक होती है।
दिवाली पर बन रहे खास योग
इस बार के संयोग गिनने से पहले एक साफ बात। पंचांग की वेबसाइटें नक्षत्र और योग के मामले में एकमत नहीं हैं, क्योंकि स्थान बदलने से समय खिसकता है। इसलिए नीचे वही बातें हैं जो पक्की दिख रही हैं।
पहली, दिवाली इस बार रविवार को है। रविवार सूर्य देव का दिन माना जाता है और अमावस्या की रात के साथ यह दिन पूजा-पाठ के लिहाज से अच्छा संयोग माना जाता है।
दूसरी, शाम को वृषभ लग्न यानी स्थिर लग्न और प्रदोष काल का मेल है। लक्ष्मी पूजा के लिए यही सबसे मजबूत संयोग गिना जाता है।
तीसरी, कई पंचांग में 8 नवंबर को चित्रा नक्षत्र दिखाया गया है। कहीं-कहीं स्वाति नक्षत्र भी मिलता है। दोनों को शुभ माना जाता है। योग के नाम पर भी एक जैसा आंकड़ा नहीं मिला, कहीं प्रीति तो कहीं आयुष्मान। इसलिए इस पर ज्यादा माथापच्ची न करें।
चौथी, 9 नवंबर को सोमवार है और अमावस्या दोपहर तक रहेगी, यानी सोमवती अमावस्या। इस दिन सुबह स्नान-दान और पितरों के तर्पण का महत्व माना जाता है। तो दिवाली की रात पूजा, अगली सुबह दान, यह क्रम बहुत अच्छा बैठ रहा है।
दिवाली का महत्व
दिवाली अंधेरे पर रोशनी की जीत का त्योहार है। सबसे लोकप्रिय कथा तो वही है जो हम बचपन से सुनते आए हैं। भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके और रावण पर विजय पाकर अयोध्या लौटे थे। नगरवासियों ने घी के दीये जलाकर उनका स्वागत किया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
दूसरी मान्यता समुद्र मंथन से जुड़ी है। कहा जाता है कि इसी अमावस्या की रात देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसलिए इस रात धन, सुख और समृद्धि की देवी का पूजन होता है। साथ में गणेश जी की पूजा बुद्धि और शुभारंभ के लिए और कुबेर जी की पूजा धन के भंडार के लिए की जाती है।
व्यापारी परिवारों के लिए यह नए साल के बही-खाते की शुरुआत भी है। गुजरात और कई जगहों पर चोपड़ा पूजन इसी दिन होता है। पूर्वी भारत में इसी रात काली पूजा की जाती है। यानी एक ही रात, अलग-अलग रंग।
लक्ष्मी पूजा की सामग्री
पूजा से एक दिन पहले यह सब इकट्ठा कर लें, ताकि मुहूर्त के समय भागदौड़ न हो:
- लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या चित्र, कुबेर यंत्र या चित्र
- चौकी और लाल या पीला कपड़ा
- कलश, आम के पत्ते और नारियल
- रोली, अक्षत (चावल), हल्दी, कुमकुम
- गंगाजल, पंचामृत
- फूल और कमल गट्टे
- घी और तेल के दीये, रुई की बाती
- धूप, अगरबत्ती, कपूर
- मिठाई, खील-बताशे, फल, सुपारी, पान
- सिक्के और नोट, बही-खाता या तिजोरी की चाबी
- सिक्के और नोट, बही-खाता या तिजोरी की चाबी
लक्ष्मी पूजा विधि
- सफाई और स्नान: दिन में ही घर की सफाई कर लें। शाम को स्नान करके साफ कपड़े पहनें। मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाएं और तोरण लगाएं।
- चौकी सजाएं: उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी रखें, कपड़ा बिछाएं। लक्ष्मी जी की मूर्ति गणेश जी के दाईं ओर रखें। पास में कलश स्थापित करें।
- संकल्प: हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर मन ही मन पूजा का संकल्प लें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें
- गणेश पूजन: सबसे पहले गणेश जी की पूजा होती है। रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा चढ़ाएं। मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः।
- लक्ष्मी पूजन: देवी को गंगाजल या पंचामृत से स्नान कराएं, वस्त्र और श्रृंगार का सामान अर्पित करें, कमल या गुलाब चढ़ाएं। मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। कम से कम 11 बार जपें।
- कुबेर और बही-खाता पूजन: कुबेर जी को नमन करें और अपने बही-खाते, तिजोरी या कैश बॉक्स पर रोली से स्वस्तिक बनाएं।
- दीपक जलाएं: घी का एक बड़ा दीया पूजा स्थल पर जलाएं। फिर घर के हर कोने, तुलसी, मुख्य द्वार और छत पर दीये रखें
- आरती: ॐ जय लक्ष्मी माता की आरती करें, परिवार के सब लोग साथ खड़े हों। फिर प्रसाद बांटें।
पूजा के बाद बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लें। यह छोटी सी बात त्योहार को असली मायने देती है।
दिवाली पर क्या करें?
- सुबह घर की सफाई पूरी करके शाम का समय पूजा के लिए खाली रखें।
- पूजा मुहूर्त के भीतर ही शुरू करें और परिवार को साथ बिठाएं।
- घर के मुख्य दरवाजे पर रोशनी रखें और रंगोली बनाएं।
- पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण करें।
- किसी जरूरतमंद को मिठाई, कपड़े या दीये दें।
- पड़ोसियों और रिश्तेदारों से मिलें, फोन पर ही सही, बधाई जरूर दें।
- मिट्टी के दीये खरीदें। इससे कुम्हार परिवारों की दिवाली भी रोशन होती है।
- पूजा के दीये देर तक जलते रहें, इसके लिए पर्याप्त घी या तेल रखें।
दिवाली पर क्या न करें?
- पूजा के बाद घर के दरवाजे बंद करके अंधेरा न करें। मुख्य द्वार पर रोशनी रखें।
- गंदे या अस्त-व्यस्त घर में पूजा न करें।
- शराब और मांसाहार से दूर रहें।
- जुआ न खेलें। यह परंपरा सालों से चली आ रही है, पर इससे नुकसान ही होता है
- किसी से झगड़ा या कड़वी बात न करें। शांत और खुश मन से पूजा करें।
- पूजा में टूटी या खंडित मूर्ति का इस्तेमाल न करें।
- पटाखे चलाते समय सावधानी रखें। बच्चों को अकेला न छोड़ें, पास में पानी की बाल्टी रखें, और जानवरों व बुजुर्गों का ध्यान रखें। धुएं से सांस के मरीजों को परेशानी होती है।
- शाम को झाड़ू न लगाएं। सफाई दिन में ही निपटा लें।
- मुहूर्त निकलने की घबराहट में जल्दबाजी न करें। श्रद्धा से की गई पूजा ही सबसे ऊपर है।
दिवाली की तैयारी का एक छोटा चेकलिस्ट
शुक्रवार को धनतेरस की खरीदारी, शनिवार तक सफाई और सजावट, रविवार सुबह तक मिठाई और पूजा सामग्री, और शाम को सिर्फ पूजा और परिवार। इस तरह चलेंगे तो आखिरी वक्त की भाग-दौड़ नहीं होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में दिवाली कब है?
दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है।
दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
दिल्ली के लिए शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक। प्रदोष काल शाम 5:31 से रात 8:09 बजे तक रहेगा। आपके शहर का समय थोड़ा अलग हो सकता है।
दिवाली 8 को है या 9 नवंबर को?
8 नवंबर को। अमावस्या 9 नवंबर की दोपहर तक है, पर शाम का प्रदोष काल 8 नवंबर को ही अमावस्या में मिलता है।
धनतेरस 2026 कब है?
शुक्रवार, 6 नवंबर।
छोटी दिवाली कब है?
काली चौदस 7 नवंबर को है और नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान दिल्ली के पंचांग में 8 नवंबर की सुबह बताया गया है। इसलिए अलग-अलग जगह तारीख 7 या 8 दिखती है।
गोवर्धन पूजा कब है?
मंगलवार, 10 नवंबर।
दिवाली का असली मतलब सिर्फ मुहूर्त और मंत्र नहीं है। यह उस रात का नाम है जब घर में सब साथ बैठते हैं, दीये जलते हैं और मिठाई बंटती है। मुहूर्त का ध्यान रखिए, विधि भी निभाइए, पर साथ में किसी एक ऐसे इंसान के घर भी एक दीया रख आइए जिसके यहां शायद कोई न पहुंचे।
आपको और आपके परिवार को दिवाली 2026 की ढेर सारी शुभकामनाएं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई तिथियां और मुहूर्त पंचांगों और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग शहरों और पंचांगों में समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। पूजा से पहले अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी से पुष्टि कर लें।






