देश भर में शराब की दुकानों पर लगी इतनी भीड़,लगता है कि आज ही GDP 10 पार हो जाएगी

केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों अनुसार शराब की दुकानें सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक सभी जोन में खुली रहेंगी। लॉकडाउन 3.0 में मिली ढील के बाद लोग जरूरी सामान की दुकानों से ज्यादा शराब की दुकानों पर देखे जा रहे हैं।

लॉकडाउन 3.0

सोशल मीडिया पर आप लोगों ने अभी तक लॉकडाउन के दौरान कपल्स को घरेलू कामों में एक दूसरे की मदद करते हुए देखा होगा। अब लॉकडाउन 3.0 में सरकार द्वारा शराब की दुकानें खोलने के निर्देश के बाद दूसरी तरह के वीडियो दिखाई देने वाले हैं।

बढ़ेगी घरेलू हिंसा

ये वीडियो जितने मनोरंजक होने वाले हैं उतने ही घरेलू हिंसा के भी हो सकते हैं। हालांकि सरकार ने आबकारी कर जुटाने और पियक्क्ड़ों की मांग पर ठेके खोलने का फैसला लिया है। लेकिन आम जनता को इससे कोई लाभ होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। उल्टा बेरोजगारी के आलम में खर्चे और बढ़ने वाले है। अब फैसले के पीछे सरकार की मंशा क्या है ? सरकार जी ही जानें।

लगभग डेढ़ महीने बाद शराब की दुकानें खुलने के बाद कर्नाटक के बेंगलुरु में अभी तक वाइन शॉप के बाहर दो किलोमीटर की लंबी लाइन लग चुकी है।

दिल्ली के लक्ष्मी नगर में भी शराब की दूकान के सामने ऐसी लाइन लगी हुई है जैसे आम चुनाव में मतदान के दौरान भी नहीं लगती है।

शराब को दुकानों के सामने लोगों की भीड़ को देखते हुए ऐसा लग रहा है जैसे आज ही भारत की जीडीपी 10 का आंकड़ा पार कर जाएगी।

देखें लोगों की प्रतिक्रियाएं

एक ट्विटर यूजर लिखते हैं ,” जिनको बेवड़ा समझा था वो असल में देश की अर्थव्यवस्था के चौथे स्तंभ निकले। सभी राज्य सरकारों ने लगभग ठेके खोलने की परमिशन दे दी है। अब तुम्हारे से ही सहारा है इकॉनोमी के साथियो। ”

दूसरे यूजर ने लिखा ,” शराब पान गुटका की दुकाने खुली रहेंगी लेकिन बुक शॉप बंद रहेंगी। मुझे समझ में नहीं आ रहा आखिर सरकार करना क्या चाहती है ? क्या आप की समझ में आया ?

एक अन्य ने लिखा ,” ठेके खुले तो लॉकडाउन में भी ढील दी गई। ” उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया है।

बहरहाल शराब का बिजनेस कौन करते हैं। सरकार के साथ उनकी क्या हिस्सेदारी होती होती है ? ये कोई लिखने वाली बात नहीं है।

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