Pratap ने ई-कचरे की मदद से 600 ड्रोन बनाकर किया देश का नाम रोशन

प्रताप ने ई-कचरे की मदद से 600 ड्रोन बनाकर किया देश का नाम रोशन

Pratap: जब कर्नाटक में बाढ़ आई थी तो प्रताप ने कचरे के ड्रोन बनाकर आपदा राहत कार्य में काफी मदद की थी। ड्रोन की मदद से बाढ़ पीड़ितों को दवाई और भोजन की मदद पहुँचाई थी।

Pratap:ने कचरे की मदद से ड्रोन बनाए

भारत देश में टैलेंट की कमी नहीं है यहां इनोवेटिव सोच रखने वाले बहुत हैं। कर्नाटक के मांड्या गांव के प्रताप एन एम उन्हीं इनोवेटिव लोगों में से एक है। खास बात यह है कि प्रताप ने कचरे की मदद से ड्रोन बनाए हैं जो कि जरूरत पड़ने पर लोगों के काम भी आते हैं। ड्रोन से प्रताप का परिचय 14 वर्ष की उम्र में हुआ था। उन्होंने 14 साल की उम्र में ही ड्रोन को खोलना और जोड़ना सीख लिया था।

जब Pratap 16 साल की उम्र तक आए तो उन्होंने कबाड़ से एक ड्रोन बनाया जो कि उड़ सकता था और तस्वीरें भी खींच सकता था। यह सब प्रताप ने खुद ही सीखा इसके बाद प्रताप ने मैसूर जेएसएस कॉलेज ऑफ आर्ट एंड कॉमर्स से बीएससी की।

प्रताप ने अब तक 600 ड्रोन विकसित किए

Times O f India की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रताप को ड्रोन वैज्ञानिक के तौर पर भी जाना जाता है। प्रताप ने अब तक 600 ड्रोन विकसित किए हैं । यही नहीं उन्होंने कई प्रोजेक्ट पर भी काम किया है। बीएसएफ़ के लिए टेलीग्राफ यातायात प्रबंधन के लिए ड्रोन तैयार करना, यूएवी यानी मानवरहित वायु यान , रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए यूएवी,ऑटो पायलट ड्रोन शामिल हैं।

नेटवर्किंग में क्रिप्टोग्राफी पर भी काम किया

उन्होंने हैकिंग से बचाव के लिए भी नेटवर्किंग में क्रिप्टोग्राफी पर भी काम किया है। जब कर्नाटक में बाढ़ आई थी तो उनके बनाए हुए ड्रोन ने आपदा राहत कार्य में काफी मदद की थी। ड्रोन की मदद से बाढ़ पीड़ितों को दवाई भोजन और अन्य राहत सामग्री पहुँचाई गई थी।

87 देशों से प्रताप को मिल चुका है निमंत्रण।

ड्रोन बनाते समय प्रताप इस बात की कोशिश करते हैं कि कम से कम प्रताप को अब तक 87 देशों से निमंत्रण मिल चुका है । प्रताप को इंटरनेशनल ड्रोन एक्सपो 2018 में अल्बर्ट आइंस्टाइन इन्नोवेशन गोल्ड मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है। साल 2017 में उनको जापान में इंटरनेशनल रोबोटिक्स प्रदर्शनी में गोल्ड और सिल्वर सम्मानित किया गया और उन्हें $10000 की राशि दी गई।।-कचरा पैदा किया जाए । वे टूटे हुए ड्रोन ,मोटर ,कैपेसिटर अन्य इलेक्ट्रॉनिक चीजों से इन ड्रोन को बनाते हैं । इससे ना सिर्फ लागत में कमी आती है बल्कि यह ड्रोन पर्यावरण के अनुकूल भी साबित होते हैं।

प्रताप को अब तक 87 देशों से निमंत्रण मिल चुका है । प्रताप को इंटरनेशनल ड्रोन एक्सपो 2018 में अल्बर्ट आइंस्टाइन इन्नोवेशन गोल्ड मैडल  से भी सम्मानित किया जा चुका है। साल 2017 में उनको जापान में इंटरनेशनल रोबोटिक्स प्रदर्शनी में गोल्ड और सिल्वर मैडल सम्मानित किया गया और उन्हें $10000 की राशि दी गई।।


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