जन्मदिन खास:पंजाब केसरी लाला लाजपत राय के जीवन से जुड़े कुछ रौचक तथ्य

आज महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय जी की जयंती है। लाला जी को ‘पंजाब केसरी’के नाम से भी जाना जाता है। लाला जी पहले भारतीय हैं जिन्होंने अंग्रेजों को काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया था।

आजादी की लड़ाई लड़ते हुए उन्होंने अपने सीने पर लाठियां खाई और देश के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया था। लाला लाजपत राय का जन्म पंजाब के दुधीके गांव में 28 फरवरी 1865 को हुआ था। 1947 के विभाजन के बाद अब दुधीके गांव पाकिस्तान में है। लाला जी के पिता का नाम मुंशी राधा कृष्ण आज़ाद और माताजी का गुलाब देवी था। लाला जी की माता जी धार्मिक प्रवृति की गृहणी थी। लाला लाजपत राय की शादी राधा देवी से वर्ष 1877 में हुई थी।

लाला लाजपत राय जी के पिता जी पेशे से शिक्षक थे। वे उर्दू और फ़ारसी भाषा के महान विद्वान थे। लाला लाजपत राय को ‘पंजाब केसरी’ के नाम से भी जाना जाता है। बतौर शिक्षक लाला लाजपत राय के पिता जी का हरियाणा के रोहतक में तबादला हो गया था। लाला जी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा हरियाणा के रेवाड़ी में ग्रहण की। उसके बाद उन्होंने लाहौर के एक महाविधालय में वकालत की पढ़ाई के लिए दाखिला ले लिया।

1886 में लाजपत राय का परिवार हिसार में आ बसा। यहीं उन्होंने वकालत की प्रैक्टिस की। 1888 -1889 के बीच उन्होंने राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया। 1892 में लाला जी लाहौर हाई कोर्ट में वकालत करने चले गए।

Remembering revolutionary freedom fighter,scholar & nationalist-Punjab Kesari Shri #LalaLajpatRai Ji on his birth anniversary. His courageous & bold actions in Simon Go Back protest inspired many young revolutionaries including Sardar Bhagat Singh.
Tribute,Respect & Salute 🌺🙏 pic.twitter.com/JI3PjepS29— Major Surendra Poonia (@MajorPoonia) January 28, 2019

लाजपत राय बचपन से ही देशभक्त थे। देश प्रेम उनकी रगों में दौड़ रहा था। देश को आजाद करवाने के लिए वे क्रांति का रास्ता अपनाने की हिमायत करते थे। उन्होंने हमेशा अंग्रेजों से पूर्ण स्वराज लेने की सिफारिश की है। लाला लाजपत राय ने भारत में पंजाब नेशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कंपनी की स्थापना की थी।

उस समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दो गुटों में बंट गया था। एक गर्म दल और दूसरा नरम दल। नरम दल में मुख्यतौर पर महात्मा गाँधी और गर्म दल में लाल-बाल-पाल की तिकड़ी थी। जिनके पुरे नाम लाला लाजपत राय,बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल थे।

लाला लाजपत राय ने वकालत छोड़कर देश को आजाद करवाने में अपनी पूरी ताकत झौंक दी। उन्होंने ब्रिटिश शासन के भारतीय लोगों पर अत्याचारों को दुनिया के सामने उजागर करने का बीड़ा उठाया। वर्ष 1914 में लाजपत राय ब्रिटेन गए ,1917 में यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ अमेरिका गए। 1917-1920 तक न्यूयोर्क में रह कर ‘इंडियन होम रूल लीग’की स्थापना की। जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद उन्होंने ब्रिटिश हकूमत का जम क्र विरोध किया। कई उग्र प्रदर्शन भी किये।

1920 में महात्मा गाँधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन छेड़ा हुआ था। लाला जी पंजाब में इसका आंदोलन को नेतृत्व कर रहे थे। लेकिन चोरा-चोरी की घटना के बाद गाँधी ने इस आंदोलन को वापिस ले लिया। जिससे खिन्न होकर विरोध करते हुए लाला लाजपत राय जी ने अपने साथियों के साथ मिलकर दूसरा दल बना लिया। जिसका नाम रखा गया ‘कांग्रेस इंडिपेंडेंस पार्टी ‘

30 ऑक्टूबर 1928 को भारत में आए साइमन कमीशन का विरोध किया और काळा झंडे दिखाए।उन्होंने ‘साइमन कमीशन गो-बैक ‘के नारे लगाए। इसी दौरान अंग्रेजी हकूमत ने उनपर लाठीचार्ज क़र दिया। जिसमें वे गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। लाठियां खाने के बाद ‘उन्होंने कहा था, मेरे शरीर पर लगी एक-एक लाठी ब्रिटिश हुकूमत के भारत ताबूत की एक एक कील साबित होगी। गंभीर चोटें लगने के कारण 17 नवंबर 1928 को 63 वर्ष उम्र में उनका देहांत हो गया।

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