CM एमएल खट्टर और BJP के पूर्व विधायक, मंत्री खास बने रहने के लिए एक से ज्यादा पेंशन नहीं छोड़ना चाहते:सांसद सुशील गुप्ता

आम आदमी पार्टी हरियाणा के प्रभारी डा. सुशील गुप्ता का कहना है कि लगता है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री,उनके मंत्री, उनके विधायक एवं भाजपा के पूर्व विधायक आम आदमी की बजाए खास बने रहना चाहते हैं और उन्हें आमजन की समस्या से कोइ सारोकार नहीं है। इसी लिए वे एक से ज्यादा पेंशन को छोडऩे को राजी न होकर अरविंद केजरीवाल का विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जबकि दिल्ली, पंजाब के बाद आम आदमी पार्टी ने हरियाणा में बिना सत्ता में आए ही एक से ज्यादा पेंशन छोडऩे का काम शुरु कर दिया है। AAP  में आए पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने चार में से तीन पेंशन छोडक़र उदाहरण पेश किया है,अब अन्य दलों के पूर्व विधायकों की बारी है।

डा. गुप्ता आज यहां पार्टी की महिला नेता आरती आरोड़ा के आवास पर कुछ उद्योगपतियों, बिल्डरों को पार्टी में शामिल करवाने के अवसर पर बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि लगता है भाजपा का सत्ता प्रेम और मलाई खाने का मोह उन्हें अरविंद केजरीवाल का विरोध करने को मजबूर कर रहा है। उन्होंने हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज द्वारा उन पर किये गये कटाक्ष पर पल्टवार करते हुए कहा कि विज सही कह रहे हैं कि सपने देखने पर कोई कर नहीं लगता। पंजाब में भी भाजपा ने कैप्टन अमरेंद्र सिंह के साथ मिलकर सरकार बनाने का सपना देखा था । मगर पूरा नहीं हुआ। मगर आम आदमी पार्टी का सपना आम आदमी का है और इसे नेता नहीं बल्कि आम जनता देख रही है और 2024 में जब भाजपा को हरियाणा की सत्ता में बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा तो उसे व अनिल विज को आम आदमी के सपने का पाता चल जाएगा।

इस अवसर पर आप के उत्तरी हरियाणा जोन के सचिव योगेश्वर शर्मा ने कहा कि भाजपा व उसके नेता झूठी ब्यानबाजी कर जनता को गुमराह करने में विश्वास करते हैं और आज तक यही तो करते आये हैं। प्रदेश में आज सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार,बेरोजगारी,महंगाई,अपराध चरम सीमा पर हैं । लोग उनसे तंग आ चुके हैं और उन्हें सत्ता से बाहर करने का मन बना चुके हैं। खुद भाजपा को भी इस बात का अहसास हो चुका है । इसी लिए अब उन्हें आप का डर सताने लगा है। जिस वजह से वह निकाय चुनाव को समय पर करवाने से डरते हुए आगे बढ़ाती जा रही है। उन्होंने कहा कि आज अगर भाजपा निकाय चुनाव या विधानसभा चुनाव करवाकर देख ले तो जनता उनका सारा वहम दूर कर देगी।

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